शुक्रवार, 26 जनवरी 2018


1947: 15 अगस्त को अंग्रेजी शासन से देश आजाद हुआ था। तब हमारे पास कोई स्थायी संविधान नहीं था। 04 नवंबर को संविधान का पहला ड्राफ्ट प्रस्तुत किया गया। 1949: 26 नवंबर को निर्मात्री समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर ने ‘संविधान सभा के अध्यक्ष’ एवं राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान की मूल प्रति सौंपी। 1950: 24 जनवरी को हिंदी और अंग्रेजी दो संस्करणों में राष्ट्रीय सभा द्वारा भारतीय संविधान का पहला ड्राफ्ट हस्ताक्षरित हुआ। 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस को भारतीय संविधान अस्तित्व में आया।

मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

JAVED birthday 19 Dec

शुक्रिया मेरे भाई मेरे दोस्तो को जिन्होंने मेरे जन्मदिन को इतना खूबसूरत बनाया दिल से शुक्रिया मेरे सभी दोस्तो का

शुक्रवार, 10 नवंबर 2017

सच्चे प्यार की सच्ची कहानी


एक लड़की ने बुज़ुर्ग से पूछा •> सच्चा प्यार बहुत नसीब वालो को मिलता है इसमें हकीकत क्या है?????.. बुज़ुर्ग ने कहा•> तुम जाओ फूलों के बाग मे और जो सबसे खूबसूरत फूल तुमको दिखे वो ले आना लड़की दुसरे दिन वापस बुज़ुर्ग पास के पास आती है कहती है •> मैंने बहुत सारे फूल देखे 1 फूल बहुत खूबसूरत था पर मुझे लगा इससे अच्छे बहुत होंगे और मै फिर ये सोच कर आगे देखने चली गई ....... लेकिन कोई और अच्छा नहीं लगा........ और जब लौट कर वापस आई तो देखा ......जिस फूल को मैंने पसंद किया था उसे किसी और ने तोड़ लिया था ...…........**********************............... तब इस पर बुज़ुर्ग का जवाब भी बहुत अच्छा था यही सच्चे प्यार हकीकत है.........जो सामने होता है उसकी कदर नहीं होती.......... और जब वापस लौटो तो वो भी मिलता इसीलिए••✓✓✓ ‌सच्चा प्यार बहुत नसीब वालो को मिलता है

रविवार, 15 अक्टूबर 2017

IAS को मिलने वाली सुविधाएं


IAS ऑफिसर बनने के बाद उन्हें क्या-क्या सुविधाएं मिलती है वह मैं बताता हूं और आईएएस को क्या-क्या काम करने पड़ते हैं वह भी बताता हूं। अगर एक बार IAS की परीक्षा निकाल लिया जाए तो हरेक महीने कम से कम ₹70000 वेतन तो जरूर मिलेगा। IAS ऑफिसर बनने के बाद उन्हें रहने के लिए एक अच्छा बड़ा सा घर दिया जाएगा। IAS ऑफिसर को ऑफिशियल काम के लिए गाड़ी और ड्राइवर भी दिया जाएगा। IAS ऑफिसर को और उनके परिवार को मेडिकल की सुविधा भी दी जाएगी और वह भी बिल्कुल मुफ्त में। अभी तक जितने फायदे बताए, यह सभी फायदे ज्यादातर सरकारी नौकरियों में मिलते हैं। लेकिन कुछ ऐसे फायदे होते हैं जो सिर्फ आई ए एस ऑफिसर को ही मिलते हैं । IAS ऑफिसर को बहुत ही ज्यादा अधिकार दिए जाते हैं वह एक तरह से सरकार और जनता के बीच का बहुत ही महत्वपूर्ण कड़ी है। कई सारे सरकारी कर्मचारी और अधिकारी किसी ना किसी IAS ऑफिसर के अंडर में काम करते हैं। उन सभी अधिकारियों को नियंत्रित IAS ऑफिसर ही करता है। कई सारे कॉन्ट्रैक्ट को आई. ए. एस. ऑफिसर ही स्वीकृति प्रदान करते हैं । सरकार के विभिन्न विकास कार्यक्रम की देखरेख IAS ऑफिसर ही करता है। IAS ऑफिसर ही कई विकास कार्यक्रमों के लिए फंड स्वीकृति देता है। आईएएस ऑफिसर यह भी सुनिश्चित करता है कि उसके प्रभाव क्षेत्र में आने वाले विभिन्न सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भ्रष्टाचार नहीं कर रहे हैं। IAS ऑफिसर को अपने अधीन विभिन्न कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का अधिकार है। IAS ऑफिसर जहां कही भी जाता है सारे लोग उनके आगे पीछे करने लगते हैं, कॉन्ट्रैक्टर से लेकर बड़े-बड़े अधिकारी उनके आगे पीछे इसलिए करते रहते हैं क्योंकि उन्हें इस बात का डर लगता है कि कहीं यह IAS ऑफिसर उनके विरुद्ध कोई कार्यवाही ना कर दें या फिर उनका कोई काम ना रोक दें। बड़े-बड़े नेता से लेकर गांव के मुखिया तक IAS ऑफिसर को जानते हैं उन्हें सम्मान देते हैं और उनके सम्पर्क में रहते हैं। सभी बड़े आयोजनों, फंक्शन और पार्टियों में IAS ऑफिसर को बुलाया जाता है और उन्हें सम्मान से स्वागत किया जाता है। आईएएस की सहमति से ही बड़े-बड़े कामों पर स्वीकृति मिलती है अगर IAS ऑफिसर चाहे तो कोई भी प्रोजेक्ट रुकवा सकता है अगर प्रोजेक्ट सही से नहीं चल रहा है तो। गांवों और शहरों के जमीन के लेनदेन से लेकर जाति प्रमाण-पत्र बनवाने का काम भी IAS ऑफिसर के हस्ताक्षर से हो पाता है।

रविवार, 24 सितंबर 2017

अधिवक्ता (Advocate) अधिनियम 1961 Mohd Javed


अधिवक्ता (Advocate) अधिनियम 1961 – (Advocate) अधिनियम 1961 – अधिवक्ता, अभिभाषक या वकील (ऐडवोकेट advocate) के अनेक अर्थ हैं, परंतु हिंदी में ऐसे व्यक्ति से है जिसको न्यायालय में किसी अन्य व्यक्ति की ओर से उसके हेतु या वाद का प्रतिपादन करने का अधिकार प्राप्त हो। अधिवक्ता किसी दूसरे व्यक्ति के स्थान पर (या उसके तरफ से) दलील प्रस्तुत करता है। इसका प्रयोग मुख्यत: कानून के सन्दर्भ में होता है। प्राय: अधिकांश लोगों के पास अपनी बात को प्रभावी ढ़ंग से कहने की क्षमता, ज्ञान, कौशल, या भाषा-शक्ति नहीं होती। अधिवक्ता की जरूरत इसी बात को रेखांकित करती है। अन्य बातों के अलावा अधिवक्ता का कानूनविद (lawyer) होना चाहिये। कानूनविद् उसको कहते हैं जो कानून का विशेषज्ञ हो या जिसने कानून का व्यावसायिक अध्ययन किया हो। वकील की भूमिका कानूनी न्यायालय में काफी भिन्न होती है। भारतीय न्यायप्रणाली में ऐसे व्यक्तियों की दो श्रेणियाँ हैं : ऐडवोकेट तथा वकील Advocate Act 1961 Hindi – ऐडवोकेट के नामांकन के लिए भारतीय “बार काउंसिल’ अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक प्रादेशिक उच्च न्यायालय के अपने-अपने नियम हैं। उच्चतम न्यायालय में नामांकित ऐडवोकेट देश के किसी भी न्यायालय के समक्ष प्रतिपादन कर सकता है। वकील, उच्चतम या उच्च न्यायालय के समक्ष प्रतिपादन नहीं कर सकता। ऐडवोकेट जनरल अर्थात्‌ महाधिवक्ता शासकीय पक्ष का प्रतिपादन करने के लिए प्रमुखतम अधिकारी है अधिवक्ता अधिनियम 1961 के धारा 35 के अंतर्गत स्टेट बार कौंसिल द्वारा अधिवक्ता के विरूद्ध प्राप्त दुराचरण की शिकायत पर अथवा स्वप्रेरणा से अधिवक्ता के विरूद्ध व्यवसायिक दुराचरण की कार्यवाही करने और अधिवक्ता को दंडित करने का प्रावधान है। कोई भी व्यक्ति अधिवक्ता के दुराचरण की शिकायत स्टेट बार कौंसिल को कर सकता है। स्टेट बार कौंसिल की अनुशासन समिति शिकायत प्रकरण रजिस्टर कर उसकी सुनवाई कर निम्न आदेशों में से कोई आदेश पारित कर सकती है:- (क) शिकायत खारिज कर सकेगी। (ख) अधिवक्ता को कोई चुनौती दे सकेगी। (ग) अधिवक्ता को विधिव्यवसाय से उतनी अवधि के लिये निलंबित कर सकेगी, जितनी ठीक समझें, निलंबन की अवधि में अधिवक्ता को विधि व्यवसाय करने की पात्रता नहीं होगी। (घ) अधिवक्ता का नाम अधिवक्ताओं की राज्य नामावली में से हटा सकेगी। अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 37 के अंतर्गत स्टेट बार कौंसिल के आदेश के विरूद्ध बार कौंसिल ऑफ इंडिया नई दिल्ली के समक्ष और धारा 38 के अंतर्गत बार कौंसिल आफ इंडिया के आदेश के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकेगी। Advocate Act 1961 – सुप्रीम कोर्ट के अनुसार अधिवक्ता के विरूद्ध व्यवसायिक दुराचरण के संबंध में अनुशासन संबंधी कार्यवाही करते समय अनुशासन समिति को संदेह के लाभ के सिद्धांत को और तथ्यों के युक्तियुक्त संदेह से परे सिद्ध करने की आवश्यकता को ध्यान में रखना चाहिए और यह भी देखा जाना चाहिए कि अधिवक्ता ने सद्भावनापूर्वक कार्य किया या दुर्भावनापूर्वक तथा अपराधिक आशय (मेन्सरिया) मौजूद था या नही। (ए.आई.आर. 1989 सुप्रीम कोर्ट 245) वकालत एवं व्यवसायिक आचार नीति के अंतर्गत अधिवक्ताओं के कृत्य जो व्यवसायिक दुराचरण की श्रेणी में आते है:- दुराचरण के श्रेणी में है:- Advocate Act 1961 1. बिना उचित प्रमाण पत्र के विधि व्यवसाय करना। 2. न्यायालय में बिना उचित कारण अनुपस्थित होना और प्रकरण को स्थगित करना। 3. मामले के विषय में मवक्किल के निर्देश के बिना कार्यवाही करना। 4. कूटरचित शपत पत्र अथवा दस्तावेज प्रस्तुत करना और शपथ अधिनियम 1969 में दिये गये वैधानीक कर्त्तव्य की अवहेलना करना। (ए.आई.आर. 1985 सुप्रीम कोर्ट 287) 5. अधिवक्ता द्वारा बार-बार न्यायालय की अवमानना करना। 6. न्यायाधीश से अपने संबधों की जानकारी देकर मुवक्किल से राशि वसूल करना। 7. न्यास भंग करना। 8. अपने मुवक्किल को नुकसान पहुंचाने का कृत्य करना। 9. विधि व्यवसाय के साथ अन्य व्यवसाय करना। 10. मामले से संबंधित प्रापर्टी का क्रय करना। 11. लीगल एड प्रकरणों में फीस की मांग करना। 12. मामले से संबंधित सच्चाई को छुपाना। 13. वकालत नामा प्रस्तुत करने के पूर्व तय की गई फीस के अतिरिक्त फीस की मांग करना और न्यायालय के आदेश पर प्राप्त रकम में शेयर की मांग करना। 14. लोकपद का दुरूपयोग करना। 15. मुवक्किल से न्यायालय में जमा करने हेतु प्राप्त रकम जमा न करना। 16. रिकार्ड एवं साक्ष्य को बिगाड़ना एवं साथी को तोड़ना। 17. मुवक्किल द्वारा अपनी केस फाईल वापस मांगने पर फाईल वापस न करना और फीस की मांग करना (सुप्रीम कोर्ट 2000(1) मनिसा नोट 27 पेज 183 सुप्रीम कोर्ट) 18. अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 24 के अंर्तगत अपात्र व्यक्ति द्वारा विधि व्यवसाय करना।(ए.आई.आर. 1997 सुप्रीम कोर्ट 864)

सोमवार, 14 अगस्त 2017

(वन्देमातरम का हिन्दी-काव्यानुवाद)


सामूहिक राष्ट्रगान (वन्दे मातरम का हिन्दी-काव्यानुवाद) जलवायु अन्न सुमधुर, फल फूल दायिनी माँ!, धन धान्य सम्पदा सुख,गौरव प्रदायिनी माँ!! शत-शत नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत! अति शुभ्र ज्योत्स्ना से, पुलकित सुयामिनी है। द्रुमदल लतादि कुसुमित, शोभा सुहावनी है।। यह छवि स्वमन धरें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!! कसकर कमर खड़े हैं, हम कोटि सुत तिहारे। क्या है मजाल कोई, दुश्मन तुझे निहारे।। अरि-दल दमन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!! तू ही हमारी विद्या, तू ही परम धरम है। तू ही हमारा मन है, तू ही वचन करम है।। तेरा भजन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!! तेरा मुकुट हिमालय, उर-माल यमुना-गंगा। तेरे चरण पखारे, उच्छल जलधि तरंगा।। अर्पित सु-मन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!! बैठा रखी है हमने, तेरी सु-मूर्ति मन में। फैला के हम रहेंगे, तेरा सु-यश भुवन में।। गुंजित गगन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!! पूजा या पन्थ कुछ हो, मानव हर-एक नर है। हैं भारतीय हम सब, भारत हमारा घर है।। ऐसा मनन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

Feke News

फेक न्यूज़ का जो पूरी तरह शिकार हो जाता हैं तंदुरुस्त होने के बावजूद भी बीमार हो जाता हैं